Tuesday, October 9, 2012


पल-पल में बदलते ,
जीवन के हालात,
प्रतिक्षण ईश्वर का,
अहसास कराते हैं,
जिसे समजना ,
इंसान के बस की,
बात नहीं,
मेरे जीवन का आयोजन,
मेरा किया हुआ है,
ये मित्थ्या अभिमान,
का कोई अर्थ नहीं,
जब डोर उपर से खींचती है,
तो हमें हर हाल में ,
नाचना पडता है.........
Photo: पल-पल में बदलते ,
जीवन के हालात,
प्रतिक्षण ईश्वर का,
अहसास कराते हैं,
जिसे समजना ,
इंसान के बस की,
बात नहीं,
मेरे जीवन का आयोजन,
मेरा किया हुआ है,
ये मित्थ्या अभिमान,
का कोई अर्थ नहीं,
जब डोर उपर से खींचती है,
तो हमें हर हाल में ,
नाचना पडता है............सुप्रभातम....अंबर

सूरज को जलना है,
धरती को सहना है,
फूलों को खिलना है,
पानी को बहना है,
सबकुछ तय है,
फिर भी ............
ये तय नहीं है,
कि...
कौन किस नज़रिए से ,
इसे देखता है,
शायद उन्हें,
सूरज का सहना और,
धरती का जलना ,
लग सकता है...
Photo: सूरज को जलना है,
धरती को सहना है,
फूलों को खिलना है,
पानी को बहना है,
सबकुछ तय है,
फिर भी ............
ये तय नहीं है,
कि...
कौन किस नज़रिए से ,
इसे देखता है,
शायद उन्हें,
सूरज का सहना और,
धरती का जलना ,
लग सकता है......सुप्रभातम.....अंबर

इंसान की नियत ,
उसकी नेकी पे ,
असर कर सकती है,
पर,नेकदिल इंसान ,
की नियत बदलना,
नामुमकिन होता है
उसके विचार ही,
उसकी अंतरात्मा का,
आयना होता है........
Photo: इंसान की नियत ,
उसकी नेकी पे ,
असर कर सकती  है,
पर,नेकदिल इंसान ,
की नियत बदलना,
नामुमकिन होता है
उसके विचार ही,
उसकी अंतरात्मा का,
आयना होता है..........सुप्रभातम...अंबर

भरी-भरी बूंदों में,
एक नाम उभर आया है,
जबकि हम जानते हैं,
ये पानी का छलावा है,
बूंदों के बहने पे,
इसने भी बह जाना है,
फिर भी अपने होने का,
एहसास उसने कराना है,
जाने के लिए ही सही,
पर याद तो उसने आना है...
Photo: भरी-भरी बूंदों में,
एक नाम उभर आया है,
जबकि हम जानते हैं,
ये पानी का छलावा है,
बूंदों के बहने पे,
इसने भी बह जाना है,
फिर भी अपने होने का,
एहसास उसने कराना है,
जाने के लिए ही सही,
पर याद तो उसने आना है.......सुप्रभातम....अंबर

मन कहे तो आसमां,
मन कहे तो दरिया,
कभी चाहें वो उड़ना ,
तो कभी चाहें डूबना,
मन पतंग बन लहराए,
तो डोर कहीं अटक जाए,
और, जब डूबना चाहें ,
तो तैर कर बाहर आ जाए,
एसो मन को क्या भरोसो,
कब कहाँ से कहां भाग जाए
Photo: मन कहे तो आसमां,
मन कहे तो दरिया,
कभी चाहें वो उड़ना ,
तो कभी चाहें डूबना,
मन पतंग बन लहराए,
तो डोर कहीं अटक जाए,
और, जब डूबना चाहें ,
तो तैर कर बाहर आ जाए,
एसो मन को क्या भरोसो,
कब कहाँ से कहां भाग जाए...........सुप्रभातम...अंबर
Photo: धडकन पे कब्ज़ा किये ,
कब तक रह पाओगे,
इस बोज के मारे जब,
हम ही चले जायेंगे,
तब तुम कहां जाओगे........सुप्रभातम....अंबर

धडकन पे कब्ज़ा किये ,
कब तक रह पाओगे,
इस बोज के मारे जब,
हम ही चले जायेंगे,
तब तुम कहां जाओगे...

वादें और कसमों में फर्क होता है,
वादा करने पर,
निभाने की इच्छा जताई जाती है,
कसमें खाने पर,
निभाने के लिए जान दी जाती है,
तभी तो ....
कोई वादे से मुकर भी जाता है,
तो कोई......
वादा निभाने की भी कसम खाता हैं.
Photo: वादें और कसमों में फर्क होता है,
वादा करने पर,
निभाने की इच्छा जताई जाती है,
कसमें खाने पर,
निभाने के लिए जान दी जाती है,
तभी तो ....
कोई वादे से मुकर भी जाता है,
तो कोई......
वादा निभाने की भी कसम खाता हैं...........सुप्रभातम...अंबर