पारदर्शक दिवार
बारीक,नाजुक सी दिवार होती है,
श्रद्धा और अंधश्रद्धा के बीच,
जो न पार करते बनती है,
ना ही,तोडते बनती है,
जब तक इंसान जीता है,
इसी दायरेमें बंधा रहता है,
और जीवनके सही मायने,
समजने कि सोच गँवा देता है........सुप्रभातम...अंबर
श्रद्धा और अंधश्रद्धा के बीच,
जो न पार करते बनती है,
ना ही,तोडते बनती है,
जब तक इंसान जीता है,
इसी दायरेमें बंधा रहता है,
और जीवनके सही मायने,
समजने कि सोच गँवा देता है........सुप्रभातम...अंबर

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