बोलने की सजा मिलती है लोगोंको,
हमने तो चुप रहकर सज़ा पाई है,
उस वक्त अगर बोल पाते कुछलफ्ज़,
आज दिलपे गम का पर्दा न पडता,
होठों को सीते-सीते दिलपे चोट खाई है,
कुछ सुनने की राहमें जिंदगी गुजर आई है.
हमने तो चुप रहनेकी सज़ा पाई है.
जिंदगी गुजर जाने पर ये ख़याल आया,
कही *रफीक बनाया तो कहीं *रकीब पाया,
जिंदगीके कई लम्होमे खुद को अकेला पाया,
कोई साथ आया भी तो दर्द साथ लाया,
ना मैने कुछ चाहा,ना कभी वक्त से माँगा,
जो कुछभी हाथ आया,बस देने के काम आया .